जगद्धात्री पूजा

दुर्गा मां धरती पर दोबारा जन्म लेकर दुष्टों का संहार करने आईं। उनके पुनर्जन्म की पूजा मां जगद्धात्री के तौर […]

दुर्गा मां धरती पर दोबारा जन्म लेकर दुष्टों का संहार करने आईं। उनके पुनर्जन्म की पूजा मां जगद्धात्री के तौर पर की जाती है। इस पूजा में…जगद्धात्री पूजा का नवरात्रि पूजा की तरह विशेष स्थान है। ये पूजा पश्चिम बंगाल और ओडिशा में खासकर की जाती है। ऐसा माना जाता है कि दुर्गा माता इस दिन धरती पर फिर से जगत की धात्री के तौर पर आती हैं। ये पूजा बंगाल के हुगली जिले में ज्यादा मनाई जाती है। इस पर्व के दौरान कई मेले लगते हैं। माता के बड़े बड़े पंडाल लगाए जाते हैं। हर जगह माहौल भक्तिमय हो जाता है।

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पूजा की शुरूआत

कहा जाता है कि इस त्योहार की शुरूआत रामकृष्ण मिशन के संस्थापक रामकृष्ण परमहंस की पत्नी ने की थी। उनकी पत्नी पुनर्जन्म में काफी विश्वास रखती थीं और उनका कहना था कि मां इस दिन फिर से धरती पर आकर दुष्टों का नाश कर के खुशियां देने आती है।

चन्दननगर की जगद्धात्री पूजा

चन्दननगर पुराने वक्त में काफी सम्पन्न इलाका था, यहां पर कई व्यापारी व्यापार करते थे। एक व्यापारी था इंद्रनारायण चौधरी। सन 1750 में उन्होंने बड़ी धूम धाम से यहां जगद्धात्री पूजा कराई। धीरे धीरे और लोगों ने भी मां की पूजा शुरू कर दी और आज पूरे देश में इसे मनाया जाता है।

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