कल्पथी रथोलस्वम
केरल के कल्पथी में रथ यात्रा होती है। ये रथ यात्रा अलग है। यहां का नज़ारा देखने वाला होता है। […]
केरल के कल्पथी में रथ यात्रा होती है। ये रथ यात्रा अलग है। यहां का नज़ारा देखने वाला होता है। माना जाता है कि जो भी इस रथ यात्रा में भाग लेता है.कल्पथी रथोलस्वम जिसे कल्पथी रथ उत्सव भी कहा जाता है, एक प्रमुख हिंदू त्योहार है जो कि केरल के कल्पथी गांव में मनाया जाता है। ये त्योहार शिव भगवान और मां लक्ष्मी के लिये समर्पित है, जो कि श्री विसाल्क्षी स्मेथा श्री विश्वनाथ स्वामी मंदिर से शुरू होता है। रथा यात्रा का ये पर्व हर साल नवंबर महीने में आता है। इस बार की यात्रा नवंबर में होगी। वक्त के साथ साथ इस रथ यात्रा की ख्याति केरल से बार भी फैल गई है और दूर दूर से लोग मंदिर में शीश नवाने के साथ साथ इस अद्भुत रथ यात्रा के भी दर्शन करते हैं।

रथ यात्रा से पहले चार दिन पूजा पाठ और वेदिक मंत्रोच्चारण किया जाता है, फिर अगले तीन दिन रथ को अच्छे से सजाया जाता है। इसको सजाने के लिये कई चीजों का प्रोयग किया जाता है। यात्रा के दिन भगवान को रथ में बैठाकर यात्रा करवाई जाती है। श्रद्धालु रथ को खींचते हैं। रथ को खींचना शुभ माना जाता है। इसलिये उसे खींचने की होड़ लगी रहती है।
मान्यता
श्री विसाल्क्षी स्मेथा श्री विश्वनाथ स्वामी मंदिर करीब 700 साल पुराना है। इसे मालाबार का सबसे पुराना शिव मंदिर भी कहा जाता है। नीला भागीरथी मंदिर के किनारे पर होना इस मंदिर की भव्यता में चार चांद लगा देता है।
कैसे पहुंचे?
कल्पथी से सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन ओल्वाकोट है, जिसकी दूरी महज 1 किलोमीटर है। अगर आग हवाई जहाज से आना चाहते हैं तो नज़दीकी एयरपोर्ट कोयंबटूर है। कोयंबटूर से कल्पथी की दूरी 55 किलोमीटर है।
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