ओणम मनाने की परंपरा (रीति रिवाज)
फूलों की रंगोली बनाना जरूरी होती है। माना जाता है कि राजा महाबलि इस दिन पाताल लोक से आते हैं […]
फूलों की रंगोली बनाना जरूरी होती है। माना जाता है कि राजा महाबलि इस दिन पाताल लोक से आते हैं और उनके स्वागत के लिये फूलों का गलीचा बिछाया जाता हैओणम- एकता, प्यार, बलिदान और नई उमंग का त्योहार है। इन दस दिनों में बहुत कुछ होता है। सबसे अहम बात होती है रंगोली की। फूलों की रंगोली बनाना जरूरी होती है। माना जाता है कि राजा महाबलि इस दिन पाताल लोक से आते हैं और उनके स्वागत के लिये फूलों का गलीचा बिछाया जाता है। घर की लड़कियां रोज इस रंगोली को सजाती हैं।

उत्तरदम के दिन यानि 9वें दिन असली त्योहार शुरू होता है। इस दिन घर को सजाया जाता है। हर जगह फूलों की महक आती है। वामन अवतार और राजा महाबलि की मिट्टी की मूर्तियां बनाई जाती हैं। मूर्तियों को लाल रंग किया जाता है। मूर्तियों को सजाया जाता है और फिर विधिपूर्वक पूजा पाठ की जाती है। पूजा खत्म होने के बाद घर के पुरुष जयकारे लगाते हैं जिसे अरापु विलिक्कुल कहते हैं।

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