ऋषि पंचमी

दूर गगन में तारों के रूप में विराजमान सप्त ऋषियों को समर्पित है ऋषि पंचमी। अगर धन और संतान सुख […]

दूर गगन में तारों के रूप में विराजमान सप्त ऋषियों को समर्पित है ऋषि पंचमी। अगर धन और संतान सुख चाहिए तो करें ये सब…आज की दुनिया का जो रुप है उसकी शुरूआत कई सदियों पहले ही हो चुकी थी। रचयिता के बाद इस दुनिया में वेद लिखे गए। चार वेदों में सात ऋषियों के बारे में पता चलता है, जिनके कुल के वंशज आज भी हैं और अधिकांश भारतीय किसी ना किसी ऋषि के कुल से संबंध रखते हैं। इन्ही सात ऋषियों का सम्मान व्यक्त करने और उनकी पूजा करने के लिये ऋषि पंचमी मनाई जाती है। इस बार ये पंचमी 3 सितंबर को मनाई जाएगी। इस पंचमी पर महिलाएं व्रत करती हैं। हालांकि ये पुरुषों के लिये भी है, लेकिन महिलाएं इस व्रत को रखती हैं। अगर ये व्रत और पूजा बिना शादिशुदा लड़कियां करें तो उनको काफी अच्छा फल मिलता है।  इस दिन अगर किसी सरोवर या नदी में स्नान हो तो वो अति उत्तम है।  इस व्रत का फल अन्य व्रतों से ज्यादा माना गया है। अगर विधान और साफ दिल से व्रत रखा जाए तो आपके सारे पाप नष्ट हो जाते हैं।

Rishi Panchami

पूजा विधि

-सातों ऋषियों की मूर्तियां स्थापित करें
-देवी अंरुधती भी स्थापित करें
-पंचामॉत स्नान करवाएं
-चंदन लेप, धूप, ज्योत आदि अपर्ण करें
-श्वेत वस्त्रों में मंत्र जाप करें
-ऋषि पंचमी व्रत कथा सुनें

पौराणिक कथाएं

ऋषि पंचमी

किसी गावँ में एक सदाचारी ब्राह्मण अपनी पत्नी के साथ रहता था। उनके परिवार में एक पुत्र और एक पुत्री थे। ब्राह्मण ने अपनी कन्या पुत्री की शादी अच्छे घर में कर दी। परंतु थोड़े समय बाद ही  उस कन्या के पति की अकाल मृत्यु हो गयी। विधवा होने के बाद वह अपने पिता के घर लौट आई। ब्राह्मण दंपत्ति विधवा पुत्री सहित कुटिया बना कर गंगा तट पर रहने लगे। एक दिन विधवा पुत्री के शरीर पर बहुत सारे कीड़े पैदा हो गए। उसने अपनी माँ को कीड़ों के बारे माँ बताया। माता पिता बहुत दुखी हुए और इसका कारण और उपाय जानने के लिए एक ऋषि के पास गए। ऋषि ने अपनी विद्या से उस कन्या के पिछले जन्म का पूरा विवरण देखा। ऋषि ने बताया कि यह कन्या पिछले जन्म में एक ब्राह्मणी थी। रजस्वला होने पर भी इसने घर के रसोई के सामान छुए थे और घर के सभी काम किये थे।।

शास्त्रों के अनुसार रजस्वला स्त्री को किसी प्रकार का काम नहीं करना चाहिए। लेकिन कन्या ने सारे काम किये। इस जन्म में भी इसने ऋषि पंचमी का व्रत नहीं किया इसीलिए इसे दंड भुगतना पड़ रहा है। उसी पाप के कारण इसके शरीर पर कीड़े पड़ गए है उपाय पूछने पर ऋषि ने कहा कि यदि कन्या ऋषि पंचमी का व्रत और पूजा भक्ति भाव से करे तथा क्षमा प्रार्थना करे तो इस पाप से मुक्ति संभव है। इससे अगले जन्म में भी इसे अटल सौभाग्य प्राप्त होगा। कन्या ने विधि विधान से ऋषि पंचमी का व्रत और पूजन किया। जिससे उसका दुःख दूर हो गया। अगले जन्म में उसे अटल सौभाग्य और धन धान्य आदि सभी सुख प्राप्त हुए।

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