कन्या संक्रांति
सूर्य हर महीने अपनी दिशा बदलता है और इसी दिशा के साथ वो अलग अलग राषियों में भी जाता है। […]
सूर्य हर महीने अपनी दिशा बदलता है और इसी दिशा के साथ वो अलग अलग राषियों में भी जाता है। हर राशि पर इसका प्रभाव होता है। अपनी राशि जानें..हिंदू मान्यता के मुताबिक 12 राशियां हैं और जब भी सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में जाता है तो उस राशि की संक्रांति शुरू हो जाती है। सूर्य के जगह बदलने से कुंडलियों के प्रभाव भी बदलते हैं। हर संक्रांति का अपना एक अलग महत्व होता है। कन्या संक्रांति भी अपने आप में खास है। इस संक्रांति के दौरान विश्वकर्मा भगवान की पूजा की जाती है। कन्या संक्रांति यूं तो पूरे देश में मनाई जाती है, लेकिन पश्चिम बंगाल और ओडिशा में ये खास तौर से मनाई जाती है। अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक ये संक्रांति सितंबर महीने में आती है।
विश्वकर्मा भगवान की पूजा
भगवान विश्वकर्मा यानि इस ब्रह्मांड के रचयिता। आज हम जो कुछ भी देखते हैं वो सब भगवान विश्वकर्मा ने ही बनाया है। माना जाता है भगवान ब्रह्मा के कहने पर विश्वकर्मा ने ये दुनिया बनाई थी। द्वारका से लेकर, भगवान शिव कि त्रिशूल भी विश्वकर्मा जी ने बनाई है।
भगवान विश्वकर्मा मंत्र
इस दिन पूजा का विशेष महत्व है। माना जाता है कि अगर कन्या संक्रांति के दिन पूरे विधि विधान के साथ पूजा अर्चना कि जाए तो सारे कष्ट दूर हो जाते हैं, व्यापार में जो कठिनाई आ रही है वो सही हो जाती है और धन सम्पदा घर आने लगते हैं।
-सबसे पहले सुबह जल्दी उठ कर स्नान करें
-पूजा स्थान को साफ करके प्रतिमा रखें
-हाथ में पुष्म, और अक्षत लेकर ध्यान लगाएं
-इस मंत्र का जाप करें
ओम् आधार शक्तपे नम:, ओम् कूमयि नम:, ओम् अन्नतम् नम:, ओम् पृतिव्यै नम:
– भगवान को भोग लगाएं
-विधिपूर्वक आरती उतारें
-अपने औजारों और यंत्रो की पूजा कर हवन करें

