80वां स्वतंत्रता दिवस 2026 -शनिवार, 15 अगस्त
हर साल 15 अगस्त को हम अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इस बार हम अपना 76 वां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। […]
हर साल 15 अगस्त को हम अपना स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं। इस बार हम अपना 76 वां स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे।
आजादी का अमृत महोत्सव
आज़ादी का अमृत महोत्सव स्वतंत्र भारत के 77 वर्ष मनाने और मनाने के लिए भारत सरकार की एक पहल है। इस स्वतंत्रता उत्सव के माध्यम से हम मौजूदा पीढ़ी को अपने पूर्वजों द्वारा किए गए स्वतंत्रता संग्राम से अवगत कराकर अपने राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव रखना चाहते हैं। भारत अपने लोगों, संस्कृति और उपलब्धियों के गौरवशाली इतिहास का जश्न मना रहा है। इस महोत्सव का उद्देश्य हमारी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और हमारे देश की विशिष्टता को बचाने के लिए देशभक्ति फैलाना है। यह स्वतंत्रता उत्सव मौजूदा पीढ़ी को हमारे पूर्वजों द्वारा किए गए स्वतंत्रता संग्रामों से अवगत कराकर हमारे देश के बेहतर भविष्य के लिए एक मजबूत नींव रखने के लिए मनाया जाता है। राष्ट्र स्वतंत्रता के लिए अपने संघर्ष, इसकी उपलब्धियों और इस अवसर पर की जाने वाली योजनाओं को याद करके स्वतंत्रता की 77 वीं वर्षगांठ मनाता है। साथ ही भारत के विकास पर भी चर्चा की जाएगी। इसमें सभी भाषाएं और सभी राज्य शामिल हैं। अमृत महोत्सव के माध्यम से हम भारत को वैश्विक मंच पर भी ला सकते हैं। स्वतंत्रता का अमृत महोत्सव मार्च 12/2021 को शुरू किया गया था, जिसने भारत की 75 वीं स्वतंत्रता वर्षगांठ के लिए 75-सप्ताह की उलटी गिनती शुरू की और 15 अगस्त 2023 को एक वर्ष के बाद पूरा होगा। अधिक जानकारी के लिए आज़ादिका-अमृत महोत्सव की आधिकारिक वेबसाइट देखें।
कैसा लगेगा अगर कोई आपके ही घर आकर आपसे मारपीट करे, आपके घर का ही सामान प्रयोग में लाए और अंत में आपसे ही घर में रहने के पैसे मांगने लग जाए… बहुत बुरा… यही नां… कुछ ऐसा ही किया था अंग्रेजों ने हमारे साथ। भारत में आए और फिर भारतीयों को ही गुलाम बना लिया। कई विद्रोह हुए, हज़ारों क्रांतिकारियों की जान गई, कई सालों तक संघर्ष चला और तब जाकर हमें आजादी मिली। 15 अगस्त 1947 वो दिन है जब आधिकारिक तौर पर अंग्रेज भारत से चले गए थे। इसे हम हर साल स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाते हैं।
प्रतिवर्ष इस दिन भारत के प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से देश को सम्बोधित करते हैं। 15 अगस्त 1947 के दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने, दिल्ली में लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर, भारतीय राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लोगों ने काफी हद तक अहिंसक प्रतिरोध और सविनय अवज्ञा आंदोलनों में हिस्सा लिया। स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत को धार्मिक आधार पर विभाजित किया गया, जिसमें भारत और पाकिस्तान का उदय हुआ। विभाजन के बाद दोनों देशों में हिंसक दंगे भड़क गए और सांप्रदायिक हिंसा की अनेक घटनाएं हुईं। विभाजन के कारण मनुष्य जाति के इतिहास में इतनी ज्यादा संख्या में लोगों का विस्थापन कभी नहीं हुआ। यह संख्या तकरीबन 1.45 करोड़ थी। 1951 की विस्थापित जनगणना के अनुसार विभाजन के एकदम बाद 72,26,000 मुसलमान भारत छोड़कर पाकिस्तान गये और 72,49,000 हिन्दू और सिख पाकिस्तान छोड़कर भारत आए।
इस दिन को झंडा फहराने के समारोह, परेड और सांस्कृतिक आयोजनों के साथ पूरे भारत में मनाया जाता है। भारतीय इस दिन अपनी पोशाक, सामान, घरों और वाहनों पर राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित कर इस उत्सव को मनाते हैं
इतिहास
यूरोपीय व्यापारियों ने 17वीं सदी से ही भारतीय उपमहाद्वीप में पैर जमाना आरम्भ कर दिया था। अपनी सैन्य शक्ति में बढ़ोतरी करते हुए ईस्ट इण्डिया कम्पनी ने 18वीं सदी के अन्त तक स्थानीय राज्यों को अपने वशीभूत करके अपने आप को स्थापित कर लिया था। 1857 के प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत सरकार अधिनियम 1858 के अनुसार भारत पर सीधा आधिपत्य ब्रितानी ताज (ब्रिटिश क्राउन) अर्थात ब्रिटेन की राजशाही का हो गया। दशकों बाद नागरिक समाज ने धीरे-धीरे अपना विकास किया और इसके परिणामस्वरूप 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई० एन० सी०) निर्माण हुआ। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद का समय ब्रितानी सुधारों के काल के रूप में जाना जाता है जिसमें मोंटेगू-चेम्सफोर्ड सुधार गिना जाता है लेकिन इसे भी रोलेट एक्ट की तरह दबाने वाले अधिनियम के रूप में देखा जाता है जिसके कारण स्वरुप भारतीय समाज सुधारकों द्वारा स्वशासन का आवाहन किया गया। इसके परिणामस्वरूप महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग और सविनय अवज्ञा आंदोलनों तथा राष्ट्रव्यापी अहिंसक आंदोलनों की शुरूआत हो गयी।

स्वतंत्र भारत की घोषणा
14 अगस्त 1947 को रात को 11.00 बजे संघटक सभा द्वारा भारत की स्वतंत्रता को मनाने की एक बैठक आरंभ हुई, जिसमें अधिकार प्रदान किए जा रहे थे। जैसे ही घड़ी में रात के 12.00 बजे भारत को आज़ादी मिल गई और भारत एक स्वतंत्र देश बन गया। तत्कालीन स्वतंत्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपना प्रसिद्ध भाषण नियति के साथ भेंट दिया।
“जैसे ही मध्य रात्रि हुई, और जब दुनिया सो रही थी, भारत जाग रहा होगा और अपनी आज़ादी की ओर बढ़ेगा। एक ऐसा पल आता है जो इतिहास में दुर्लभ है, जब हम पुराने युग से नए युग की ओर जाते हैं…क्या हम इस अवसर का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त बहादुर और बुद्धिमान हैं और हम भविष्य की चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं?” – पंडित जवाहरलाल नेहरू
इसके बाद तिरंगा झण्डा फहराया गया और लाल क़िले की प्राचीर से राष्ट्रीय गान गाया गया।
अनेकानेक आयोजन
स्वतंत्रता दिवस को पूरी निष्ठा, गहरे समर्पण और अपार देश भक्ति के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। स्कूलों और कालेजों में यह दिन सांस्कृतिक गतिविधियों, कवायद और ध्वज आरोहण के साथ मनाया जाता है। दिल्ली में प्रधानमंत्री लाल किले पर तिरंगा झंडा फहराते हैं और इसके बाद राष्ट्र गान गाया जाता है। वे राष्ट्र को संबोधित भी करते हैं और पिछले एक वर्ष के दौरान देश की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हैं तथा आगे आने वाले समय के लिए विकास का आह्वान करते हैं। इसके साथ वे आज़ादी के संघर्ष में शहीद हुए नेताओं को श्रद्धांजलि देते हैं और आज़ादी की लड़ाई में उनके योगदान पर अभिवादन करते हैं। एक अत्यंत रोचक गतिविधि जो स्वतंत्रता दिवस के साथ जुड़ी हुई है, वह है पतंग उड़ाना, जिसे आज़ादी और स्वतंत्रता का संकेत कहा जाता है।
प्रभातफेरी
स्कूलों और संस्थाओं द्वारा प्रात: ही प्रभातफेरी निकाली जाती हैं जिनमें बच्चे, युवक और बूढ़े देशभक्ति के गाने गाते हैं और उन वीरों की याद में नुक्क्ड़ नाटक और प्रशस्ति गान करते हैं।
देशभक्ति का प्रदर्शन
भारत एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाला देश है और यह दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। यहाँ के नागरिक देश को और अधिक ऊंचाइयों तक ले जाने की वचनबद्धता रखते हैं जहां तक इसके संस्थापकों ने इसे पहुंचाने की कल्पना की। जैसे ही आसमान में तिरंगा लहराता है, प्रत्येक नागरिक देश की शान को बढ़ाने के लिए कठिन परिश्रम करने का वचन देता है और भारत को एक ऐसा राष्ट्र बनाने का लक्ष्य पूरा करने का प्रण लेता है जो मानवीय मूल्यों के लिए सदैव अटल है।
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